Tuesday, 29 April 2025

खेजड़ली हत्याकांड

 

खेजड़ली हत्याकांड

खेजड़ली हत्याकांड भारत के पर्यावरण संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक घटना है। यह 18वीं सदी में घटित हुआ था और इसने “चिपको आंदोलन” जैसे भविष्य के पर्यावरण आंदोलनों को प्रेरित किया। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

घटना का नाम:

खेजड़ली हत्याकांड (Khejarli Massacre)

घटनास्थल:
खेजड़ली गाँव, जोधपुर ज़िला, राजस्थान

घटनाकाल:
10 सितंबर 1730

खेजड़ली हत्याकांड भारत के पर्यावरण संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक घटना है। यह 18वीं सदी में घटित हुआ था और इसने “चिपको आंदोलन” जैसे भविष्य के पर्यावरण आंदोलनों को प्रेरित किया।

पृष्ठभूमि:

राजस्थान के बिश्नोई समुदाय द्वारा पेड़ों और प्रकृति की रक्षा को अत्यंत महत्त्व दिया जाता है।

खेजड़ी का पेड़ (Prosopis cineraria) इस क्षेत्र में बहुत महत्त्वपूर्ण होता है — यह न केवल पर्यावरण को संतुलित करता है बल्कि बिश्नोई समाज की आस्था का प्रतीक भी है।

घटना का विवरण:

जोधपुर के तत्कालीन महाराजा ने अपने किले के निर्माण या चूने के भट्टों के ईंधन हेतु खेजड़ी के पेड़ों को काटने का आदेश दिया।

राजा के मंत्री गिरधारी भंडारी के नेतृत्व में एक दल खेजड़ली गाँव पहुंचा, जहाँ उन्होंने पेड़ काटने शुरू कर दिए।

अम्मृता देवी बिश्नोई नाम की एक महिला ने इसका विरोध किया और पेड़ों को बचाने के लिए खुद को एक पेड़ से लिपटा लिया।
उन्होंने ऐलान किया:

“सिर साटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण”
(यदि पेड़ बचाने के लिए सिर भी कट जाए तो भी सस्ता सौदा है।)

सैनिकों ने पहले अम्मृता देवी और फिर उनकी तीन बेटियों को पेड़ों सहित हत्या कर दी।

यह सुनकर आसपास के गांवों से बिश्नोई समुदाय के और लोग आए और वे भी पेड़ों से लिपटकर खड़े हो गए।

इस प्रकार 363 बिश्नोई पुरुषों और महिलाओं की जानें गईं, जिन्होंने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए बलिदान दिया।

परिणाम और प्रभाव:

इस बलिदान से प्रभावित होकर महाराजा ने पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और बिश्नोई क्षेत्रों में पेड़ों और वन्यजीवों की सुरक्षा का आदेश दिया।
यह घटना भारत का प्रथम संगठित पर्यावरण आंदोलन मानी जाती है।
1970 के दशक में उत्तराखंड में हुए चिपको आंदोलन ने भी इस घटना से प्रेरणा ली।

वर्तमान में महत्त्व:
खेजड़ली गाँव में आज भी “शहीदों का स्मारक” बना है ।

हर वर्ष 10 सितंबर को वहां “खेजड़ली दिवस” मनाया जाता है।

यह घटना विश्व स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और समुदाय की सहभागिता का प्रतीक मानी जाती है ।

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